कफज पाचन कॉम्बो — Kaphaj Digestive Wellness Combo — 6-Product Kapha Digestive Kit
"Heaviness, Sluggishness, Mucus, Nausea — Kapha is the Root"
भारीपन, सुस्ती, आंव, जी मिचलाना — कफ है जड़ | Base (5) + Kapha Add-on (1) = 6 Products
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पहले यह पहचानिए — क्या आपको कफज प्रकार है?
देखिए, कफज वाली समस्या बहुत अलग है — इसमें बार-बार शौच नहीं जाते जैसे वातज में जाते हैं। पर खाना बहुत मुश्किल से पचता है — शरीर भारी-भारी लगता है — जैसे किसी ने पत्थर रख दिया हो अंदर। योगरत्नाकर — ग्रहणी निदान — कफज ग्रहणी लक्षणम् में आचार्य ने बहुत साफ बताया है:
🧊 खाना बहुत मुश्किल से पचे — खाओ तो लगता है पेट में पड़ा ही रह गया
🤢 जी मिचलाना, उबकाई — हमेशा उल्टी जैसा मन — खासकर सुबह उठते ही
👅 मुंह में कफ लिपटा — जीभ पर मोटी सफेद/पीली coating — मुंह का स्वाद मीठा-मीठा
🤧 बार-बार खांसी, कफ, नजला — नाक से पानी, सिर भारी, गर्दन जकड़न
💩 मल चिपचिपा-भारी — आंव (mucus) मिला हुआ — कभी टुकड़ों में
😴 शरीर भारी-भारी, आलस, नींद ज़्यादा — उठने का मन नहीं करता
🍽️ भूख बिल्कुल नहीं — खाने में मन ही नहीं — अरुचि
🫁 मीठी-दूषित डकारें — खट्टी नहीं, मीठी-सड़ी सी
🏋️ दिखने में मोटे-पुष्ट — पर अंदर से बहुत कमज़ोर — मानसिक रूप से भी
⚠️ बार-बार शौच नहीं जाते — यह कफज की खासियत है — वातज/पित्तज में बार-बार जाते हैं, कफज में नहीं — पर खाना पचता भी नहीं
अगर 3-4 लक्षण मिल रहे हैं — तो कफ प्रमुख है। यह कॉम्बो आपके लिए बना है।
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कफज को Base कॉम्बो से ज़्यादा क्यों चाहिए?
सर्वग्रहणी सम्पूर्ण कॉम्बो (Base — 5 उत्पाद) अग्नि जगाता है + आम निकालता है। पर कफज वालों की एक अतिरिक्त समस्या है:
समस्या — जिद्दी कफ + आंव (Mucus):
कफज में सामान्य आम ही नहीं — कफ + आंव (Mucus) आंतों में चिपका होता है। यह सामान्य आम से अलग है — यह ज़्यादा चिपचिपा, ज़्यादा भारी, ज़्यादा जिद्दी है। सामान्य दीपन-पाचन द्रव्य इसे पूरी तरह नहीं तोड़ पाते।
इसके लिए चाहिए — क्षार (Kshara) — शुद्ध सज्जीखार + जवाखार — ये सामान्य पाचन उत्पादों में नहीं मिलते। ये जिद्दी कफ-आंव को तोड़ने में विशेष सहायक हैं।
इसीलिए आचार्य ने कफज ग्रहणी चूर्ण बताया — 7 द्रव्य जिसमें दो क्षार (सज्जीखार + जवाखार) + कचूर + पिपरामूल — ये सब कफ संतुलन विशेषज्ञ हैं। बिजौरा नींबू रस + गुनगुने नमक वाले पानी के साथ।
Base अग्नि + सामान्य आम ठीक करे। Kapha add-on जिद्दी कफ-आंव तोड़े + बुझी अग्नि प्रचंड करे। दोनों मिलकर = सम्पूर्ण कफज प्रोटोकॉल।
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📦 कॉम्बो में क्या-क्या है — 6 उत्पाद:
🟢 BASE — सर्वग्रहणी (5 उत्पाद — सबके लिए अनिवार्य):
| 1. शुण्ठ्यादि क्वाथ (250g) | 🍵 आम निकालने वाला — भोजन से 45 मि. पहले ताज़ा काढ़ा |
| 2. हिङ्ग्वष्टक चूर्ण (100g) | 🔥 अग्नि तेज़ करने वाला — पहले ग्रास में घी के साथ |
| 3. चाव चित्रकादी चूर्ण (200g) | 🛡️ आम नाशक + आंत मज़बूत — भोजन के आखिर में कफज छाछ से |
| 4. अग्नि बलवर्धक चूर्ण (200g) | ⚡ अग्नि बलवान — सुबह खट्टी छाछ से |
| 5. अजीर्णहर उदर लेप (100g) | 🔄 फैक्ट्री रिसेट — पेट पर लगाओ — ⚠️ सिर्फ बाहरी |
🟢 KAPHA ADD-ON (1 उत्पाद — कफ-विशिष्ट):
| 6. कफज ग्रहणी चूर्ण (200g) | 🧊 जिद्दी कफ-आंव तोड़ने वाला + बुझी अग्नि प्रचंड करने वाला 7 द्रव्य: कचूर, सोंठ, पीपल, हरड़, सज्जीखार, जवाखार, पिपरामूल क्या विशेष है? इसमें दो क्षार (सज्जीखार + जवाखार) हैं — ये शुद्ध (शोधित) खनिज लवण हैं जो सामान्य पाचन उत्पादों में नहीं मिलते। ये कफ संतुलन में विशेष सहायक। कैसे लेना है? ½-1 चम्मच चूर्ण + 1 चम्मच बिजौरा नींबू रस + आधा ग्लास गुनगुना नमक वाला पानी — सुबह खाली पेट — दिन में 1 बार। शास्त्र कहता है: "शटी व्योषाभयं क्षारौ ग्रन्थिकं बीजपूरकम् | लवणाम्लाम्बुना पेयं श्लैष्मिके ग्रहणीगदे" — कफज पाचन असंतुलन में ये 7 द्रव्य बिजौरा नींबू रस + नमकीन गुनगुने पानी से सेवन करने का विधान। ⚠️ लेने के 1 घंटे बाद तक कुछ न लें। |
कुल: 6 उत्पाद | 33 द्रव्य | क्षार + त्रिकटु + कचूर | सम्पूर्ण कफज प्रोटोकॉल
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कफज ग्रहणी चूर्ण — क्यों विशेष?
देखिए, अधिकतर पाचन उत्पादों में सोंठ, मरिच, हींग — ये सब आम (common) द्रव्य हैं। पर कफज ग्रहणी चूर्ण में कुछ ऐसा है जो किसी और में नहीं मिलता:
⚡ क्षार (Kshara) — सज्जीखार + जवाखार:
ये शुद्ध (शोधित) खनिज लवण हैं। आयुर्वेद में क्षार को कफ संतुलन में सबसे विशेष माना गया है। सामान्य चूर्णों में ये नहीं मिलते — इसीलिए सामान्य चूर्ण कफज की जिद्दी समस्या पर पूरा काम नहीं कर पाते।
🌿 कचूर + पिपरामूल — गहरे कफ संतुलन विशेषज्ञ:
कचूर (हल्दी परिवार) और पिपरामूल (पीपल की जड़) — दोनों पारम्परिक रूप से गहरे कफ संतुलन में सहायक। ऊपरी कफ तो सोंठ-मरिच से भी ठीक हो जाए — पर गहराई में जमा कफ-आंव इन दोनों से टूटता है।
🍋 बिजौरा नींबू रस — शास्त्रोक्त अनुपान:
बिजौरा नींबू (Citrus medica) सामान्य नींबू से बिल्कुल अलग — बड़ा, खुरदरा, बहुत सुगंधित। शास्त्र में इसे "मातुलुङ्ग" कहा गया है। यह चूर्ण की शक्ति बढ़ाने + क्षार की तीक्ष्णता सौम्य बनाने में सहायक।
बिजौरा न मिले तो सामान्य नींबू भी चलेगा — पर बिजौरा सर्वोत्तम।
7 द्रव्य + क्षार + बिजौरा = कफज का सबसे शक्तिशाली संयोजन।
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📋 सम्पूर्ण दैनिक रूटीन — कफज ग्रहणी:
| कब | क्या | कैसे |
|---|---|---|
| 🌅 सुबह (फ्रेश होने के बाद) |
अग्नि बलवर्धक | ½-1 चम्मच फंकी → खट्टी छाछ |
| 🌅 सुबह (खाली पेट) |
कफज ग्रहणी चूर्ण 🟢 KAPHA ADD-ON |
½-1 चम्मच चूर्ण + 1 चम्मच बिजौरा नींबू रस + आधा ग्लास गुनगुना नमक वाला पानी मिक्स करके पी लो। ⚠️ दिन में 1 बार — सिर्फ सुबह। 1 घंटे बाद तक कुछ न लो। |
| 🍽️ भोजन से 45 मि. पहले (सुबह + शाम) |
शुण्ठ्यादि क्वाथ | ताज़ा काढ़ा — 40ml गुनगुना 💡 हर बार ताज़ा बनाओ |
| 🥄 पहला ग्रास | हिङ्ग्वष्टक | ¼ चम्मच + ¼ चम्मच घी → पहले निवाले में |
| 🍛 भोजन के आखिर में (सुबह + शाम) |
चाव चित्रकादी | ½-1 चम्मच फंकी → कफज छाछ कफज छाछ: ¼ चम्मच हरड़ (हरीतकी) चूर्ण मिलाकर — या फंकी मारकर ऊपर से छाछ |
| 🌙 आराम के समय | अजीर्णहर लेप | पेट पर लगाओ → 1 घंटा → धो लो ⚠️ सिर्फ बाहरी — खाना नहीं |
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एक नज़र में — कफज ग्रहणी का पूरा दिन:
| समय | उत्पाद | कैसे |
|---|---|---|
| 🌅 सुबह | अग्नि बलवर्धक | फंकी + खट्टी छाछ |
| 🌅 सुबह | 🟢 कफज ग्रहणी चूर्ण | चूर्ण + बिजौरा नींबू + गुनगुना नमकीन पानी |
| 🍽️ 45 मि. पहले | शुण्ठ्यादि क्वाथ | 40ml गुनगुना काढ़ा |
| 🥄 पहला ग्रास | हिङ्ग्वष्टक | ¼ चम्मच + घी |
| 🍛 भोजन के बाद | चाव चित्रकादी | फंकी + कफज छाछ (हरड़ मिलाकर) |
| 🌙 आराम | अजीर्णहर लेप | पेट पर — 1 घंटा — धो लो |
🟢 = Kapha Add-on
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बिजौरा नींबू क्या है? कहां मिलेगा?
बिजौरा नींबू (Citrus medica) सामान्य नींबू से बिल्कुल अलग है:
→ बड़ा, खुरदरा, मोटे छिलके वाला, अत्यंत सुगंधित
→ शास्त्र में "मातुलुङ्ग" कहा गया है
→ कहां मिलेगा: पंसारी / जड़ी-बूटी की दुकान, आयुर्वेदिक स्टोर, या ऑनलाइन
→ न मिले तो: सामान्य नींबू का रस भी चलेगा — पर बिजौरा सबसे अच्छा
💡 Shortcut: बार-बार रस न निकालना चाहें तो — चूर्ण में बिजौरा रस मिलाकर सुखा लो, फिर दोबारा पीस लो। इससे नींबू के गुण चूर्ण के कण-कण में समा जाते हैं।
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🥛 छाछ गाइड (कफज):
कफज छाछ: छाछ में ¼ चम्मच हरड़ (हरीतकी) चूर्ण मिलाकर पियो।
या — चूर्ण की फंकी मारो, ऊपर से सादी छाछ पी लो।
💡 हरड़ कफ + आम दोनों में सहायक — त्रिदोष संतुलक।
💡 ताज़ी घर की मथी छाछ सबसे अच्छी।
⚠️ रात को देर से छाछ न पियें।
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कफज vs वातज vs पित्तज — क्या फर्क?
| 💨 वातज | 🔥 पित्तज | 🧊 कफज | |
|---|---|---|---|
| मल | कभी पतला, कभी सूखा | पीला, पतला, दुर्गंध | चिपचिपा, भारी, आंव |
| बार-बार शौच | हां | हां | नहीं — पर पचता भी नहीं |
| मुख्य शिकायत | गैस, बदलता दर्द | जलन, खट्टी डकार | भारीपन, सुस्ती, आंव |
| शरीर | रूखा, सूखा, पतला | गर्म, पीला, पसीना | भारी, फूला, आलसी |
| Add-on | सर्वाजीर्ण + शुण्ठी घृत | रसांजनादि + बिल्वादि | कफज ग्रहणी चूर्ण |
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🍽️ आहार — कफज के लिए विशेष:
कफज में आहार सबसे ज़्यादा ज़रूरी है — क्योंकि भारी खाना ही कफ बढ़ाता है:
| ❌ बिल्कुल नहीं | ✅ खा सकते हैं |
|---|---|
|
दूध, दही, पनीर, मिठाई — कफ बढ़ाते हैं भारी दालें — उड़द, राजमा, चना तला-भुना, मैदा, बेकरी ठंडा खाना-पानी, आइसक्रीम केला, चीकू, आम (मीठे फल) चावल (ज़्यादा) — भारी मांसाहार (भारी) बिना भूख खाना दिन में सोना — कफ और बढ़ता है बिना प्यास ज़्यादा पानी |
लौकी, तोरई, करेला, मेथी मूंग दाल (पतली) पुराना चावल (थोड़ा), बाजरा, ज्वार रोटी गर्म पानी — दिन भर (बहुत ज़रूरी) अदरक-तुलसी चाय शहद (थोड़ा) — कफ कम करने में सहायक हल्दी + गर्म पानी भूख लगे तभी खाओ सुबह जल्दी उठो — सोते मत रहो हल्का व्यायाम, तेज़ चलना, योग |
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🧘 जीवनशैली — कफज के लिए विशेष:
✅ सुबह जल्दी उठो — दिन में सोना = कफ और बढ़ेगा
✅ गर्म पानी पियो — दिन भर — ठंडा पानी बिल्कुल बंद
✅ तेज़ चलो, व्यायाम करो — कफ वालों को शारीरिक गतिविधि सबसे ज़्यादा ज़रूरी
✅ भूख लगे तभी खाओ — बिना भूख मत खाओ — कफ और बढ़ेगा
✅ हल्दी + शहद + गर्म पानी — सुबह — कफ संतुलन में सहायक
✅ सर्दी/बरसात में विशेष सावधानी — ये कफ बढ़ने वाले मौसम हैं
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:
मुझे कैसे पता कफज है?
भारीपन #1 शिकायत। सुबह जी मिचलाना/उबकाई। मल चिपचिपा-आंव मिला। जीभ पर मोटी परत। बार-बार शौच नहीं जाते पर खाना पचता भी नहीं। शरीर भारी-आलसी। 3-4 मिलें तो कफज।
क्षार (सज्जीखार + जवाखार) सुरक्षित हैं?
शास्त्रोक्त मात्रा (½-1 चम्मच पूरे चूर्ण का) में क्षार की मात्रा बहुत कम है — पारम्परिक रूप से सुरक्षित माना जाता है। निर्धारित मात्रा से अधिक न लें।
बिजौरा नींबू कहां मिलेगा?
पंसारी, जड़ी-बूटी दुकान, आयुर्वेदिक स्टोर, या ऑनलाइन। न मिले तो सामान्य नींबू चलेगा।
पित्त प्रकृति वाले ले सकते हैं?
यह चूर्ण उष्ण + क्षार युक्त है — पित्तज वाले कम मात्रा में लें या विशेषज्ञ से पूछें। पित्त संतुलन के लिए पित्तज पाचन कॉम्बो अधिक उपयुक्त।
कब सबसे अच्छा असर होता है?
सर्दियों और बरसात में — ये कफ बढ़ने वाले मौसम हैं — इस समय विशेष रूप से उपयुक्त। पर जब भी कफज लक्षण हों, ले सकते हैं।
कितने दिन करना है?
कम से कम 30 दिन सही अनुशासन + आहार से। पुरानी समस्या है तो लम्बा चल सकता है।
गर्भवती?
चित्रकमूल (Base में) है — गर्भावस्था में उपयुक्त नहीं। चिकित्सक से परामर्श।
बच्चों को?
क्षार युक्त — बच्चों को विशेषज्ञ सलाह से। वयस्कों के लिए अधिक उपयुक्त।
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⚠️ सावधानियाँ:
⚠️ गर्भवती — न लें (चित्रकमूल)
⚠️ पित्तज — कम मात्रा (उष्ण + क्षार)
⚠️ अजीर्णहर लेप — सिर्फ बाहरी — खाएं नहीं
⚠️ नमी से बचाएं — क्षार नमी सोखते हैं — ढक्कन बंद रखें
⚠️ गीले हाथों से न छुएं
⚠️ निर्धारित मात्रा से अधिक न लें
⚠️ कफज ग्रहणी चूर्ण दिन में 1 बार ही — सुबह खाली पेट
⚠️ लेने के 1 घंटे बाद तक कुछ न लें
⚠️ बच्चों को विशेषज्ञ सलाह से (क्षार)
⚠️ ठंडा पानी बिल्कुल बंद — गर्म पानी पियें
⚠️ दिन में सोना बंद — कफ और बढ़ता है
⚠️ रात को देर से छाछ न पियें
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Disclaimer: These products are not intended to diagnose, treat, cure, or prevent any disease. These are traditional Ayurvedic food products. For external use product (Ajirnhar Lep) — do not ingest. Results may vary. Consult a qualified healthcare professional for any health concerns.
यह उत्पाद किसी रोग के निदान, उपचार या रोकथाम हेतु नहीं हैं। ये पारम्परिक आयुर्वेदिक आहार हैं। बाहरी उपयोग उत्पाद (अजीर्णहर लेप) खाएं नहीं। परिणाम व्यक्ति अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
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